चीन के लैब ने कहा- नई दवा से महामारी को रोका जा सकता है, वैक्सीन की भी जरूरत नहीं होगी
![]() |
यूनिवर्सिटी के बीजिंग एडवांस्ड इनोवेशन सेंटर फॉर जीनोमिक्स के निदेशक सन्नी झी ने एएफपी को बताया कि जानवरों पर इसका परीक्षण सफल रहा है |
वैज्ञानिक इस दवा की टेस्टिंग चीन के प्रतिष्ठित पेकिंग यूनिवर्सिटी में कर रहे हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस दवा से न केवल संक्रमित लोग जल्दी ठीक हो रहे हैं, बल्कि यह कुछ समय के लिए वायरस से लड़ने के लिए इम्यून भी प्रदान करताहै।
जानवरों पर परीक्षण सफल
यूनिवर्सिटी के बीजिंग एडवांस्ड इनोवेशन सेंटर फॉर जीनोमिक्स के निदेशक सन्नी झी ने एएफपी को बताया कि जानवरों पर इसका परीक्षण सफल रहा है। जब हमने एक संक्रमित चूहे के अंदर न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडी इंजेक्ट कियातो पांच दिन के बाद वायरल लोड 2500 तक कम हो गया। इसका मतलब है कि इस संभावित दवा का चिकित्सीय प्रभाव हुआ है।
यह दवा न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडी का इस्तेमाल करता है, जिसे ह्यूमन इम्यून सिस्टम प्रोड्यूस करताहै। ताकि कोशिकाओं को वायरस से संक्रमित होने से बचायाजा सके। झी की टीम ने 60 ठीक हुए मरीजों से एंटीबॉडी को निकाला।
एंटीबॉडी के इस्तेमाल से बीमारी का इलाज संभव
टीम की रिसर्च रविवार को एक जर्नल में प्रकाशित की गई थी। इसमें कहा गया था कि एटीबॉडी के इस्तेमाल से बीमारी काइलाज संभव है। साथ ही इससे रिकवरी टाइम भी कम हो जाता है। झी ने कहा कि एंटीबॉडी के लिए उनकी टीम दिन-रात काम कर रही थी। उन्होंने कहा कि क्लिनिकल ट्रायल की योजना पर काम चल रहा है। इसका ट्रायल ऑस्ट्रेलिया या किसी दूसरे देश में किया जाएगा। क्योंकि चीन में मामले कम हो गए हैं।
‘एक टीका बनने में 12 से 18 महीने लग सकते हैं’
उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि ये न्यूट्रिलाइज्ड एंटीबॉडी महामारी के इलाज के लिए एक महत्वपूर्ण दवा बन सकताहै। वहीं, पिछले हफ्ते एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा था कि चीन में पहले से ही पांच वैक्सीन का इंसानों पर ट्रायल किया जा रहा है। वहीं,डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि एक टीका विकसित करने में 12 से 18 महीने लग सकते हैं।
No comments:
Post a Comment